29 बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित  निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा !



बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर

- एक केले को बीच से चीरा लगाकर चुना बराबर कपर बीच में रख दें फिर इसे खाए इससे बवासीर एकदम ठीक हो जाती है साथ में देशी गाय का मूत्र भी पीयें। - अगर रोग बढ गया है तो आपको साथ में ये होम्योपैथिक दवा भी खाना होगा -  Nux Vomica 30 - रोज रात को एक बूंद - Sulphar 200 - हफ्ते में एक दिन सुबह-दोपहर-शाम एक-एक बूंद दिन में तीन बार नोट :- अस्थमा के मरीज को कभी भी सल्फर नहीं देना।




30  गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छुने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न  

https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/30.html




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