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Showing posts from May, 2025

20 चोट लगने और खून बहने पर इसकी चिकित्सा

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! चोट लगने और खून बहने पर इसकी चिकित्सा शरीर पर चोट लगने से खून बहने पर होम्योपैथी की दवा हाईपेरिकम 200 2-2 बूंद हर आधे घण्टे से तीन बार, अगर चोट ज्यादा है और खून बह रहा है तो हाईपेरिकम 1M 1-1 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार देना है। अगर सिर पर बहुत चोट हो और सिर से बहुत खून बह रहा हो तो हाईपेरिकम 10M, 50M, 1CM ताकत की दवाई देना होगा। ये दवाई नया खून भी बनाती है लेकिन वही खून चोट दोरान निकल गया है रक्त दान खून वाला नही ।   21  टिटनेस    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/21.html

45 लौकी परीक्षण

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! लौकी परीक्षण ये केसे पता करें की लोकी असली है या इंजेक्शन लगे हुई है ! आप लोग लोकी पर नाखून लगाकर देख लीजिये की नाखून पूरा आंदर जाता है या नही -  अगर नाखून पूरा अंदर जाता है तो लोकी असली है -  अगर नाखून पूरा अंदर नही जाता है और वह पर केवल निशान बन जाता है तो लोकी इंजेक्शन लगाई गई लोकी है कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !! और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला में दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !! 01  स्वस्थ रहने की​ कुंजी    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/01.html

44 हृदय ब्लॉक का आयुर्वेदिक इलाज

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! हृदय ब्लॉक का आयुर्वेदिक इलाज दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनिया जो दवाइया भारत में बेच रही है ! वो अमेरिका में 20-20 साल से बूंद है ! आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है ! वो आज कल दिल के रोगी (Heart Patient) को सबसे दी जा रही है !! भगवान ना करे कि आपको कभी जिंदगी में दिल का दौरा आए ! लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक्टर के पास ! और आपको मालूम ही है एक एंजियोप्लास्टी आपरेशन आपका होता है ! एंजियोप्लास्टी आपरेशन में डाक्टर दिल की नली में एक ​िस्प्रंग डालते हैं ! उसको स्टंट कहते हैं ! और ये स्टंट अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है ! और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपए में बेचते है और ऐसे लूटते हैं आपको ! और एक बार अटैक में एक स्टंट डालेंगे ! दूसरी बार दूसरा डालेंगे! डाक्टर को कमीशन है इसलिए वे बार बार कहता हैं एंजियोप्लास्टी करवाओ !! इस लिए कभी मत करवाए ! तो फिर आप बोलेंगे हम क्या करे ????! आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे ...

43 चुना

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! चुना भारत के जो लोग चुने से पान खाते है, बहुत होसियार लोग है पर तम्बाकू नही खाना, तम्बाकू जहर है और चुना अमृत है .. तो चुना खाइए तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चुने का उसमे कत्था मत लगाइए, कत्था कैंसर करता है, पान में सुपारी मत डालिए सोंट डालिए उसमे, इलाइची डालिए, लोंग डालिए. केशर डालिए य ये सब डालिए पान में चुना लगाके पर तम्बाकू नही, सुपारी नही और कत्था नही । महिलाओं के लिए गर्भाशय की बीमारीयों में यह बहुत अच्छा काम करता है जैसे कि सफेद पानी आना, लाल पानी आना, माहवारी आगे-पीछे होना, गर्भाशय में गांठ बन जाना तथा अन्य सभी गर्भाशय से जुड़ी बीमारीयों को चुना ठीक करता है। बाल टॅटना, चेहरे के मुहांसे, हड्डी के टूटने पर, जोड़ों के दर्द में, हीमोग्लोबिन का प्रतिशत कम हो तो, हैपेटाईटिस A, B, C, D, E, स्मरण शक्ति कम हो तो, हाथी पैर हो गया तो इन सब बीमारीयों में चुना दही में अथवा पानी में मिला कर लेना चाहिये। पुरूषों में शुक्राणु बढ़ाने के लिए चुना गन्ने या संतरे या...

42 गोमूत्र-घृत-दुग्ध के गुण

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! गोमूत्र-घृत-दुग्ध के गुण गोमूत्र माने देशी गाय (जर्सी नही) के शरीर से निकला हुआ सीधा साधा मूत्र जिसे  सती के आठ परत की कपड़ों से छान कर लिया गया हो। - गोमूत्र वात और कफ  को अकेला ही नियंत्रित कर लेता है। पित्त के रोगों के लिए इसमें कुछ औषधियाँ मिलायी जाती हैं। - आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से दमा अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा सब  ठीक  होता  है।  और  गोमूत्र  पीने  से  टीबी  भी  ठीक  हो  जाता  है,  लगातार पांच छह महीने पीना पड़ता है। - गोमूत्र में पानी के अलावा कैल्शियम, सल्फर, आयरन जैसे 18 सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। - त्वचा का कैसा भी रोग हो, वो शरीर में सल्फर की कमी से होता हए। Soarises, Egzima, घुटने दुखना, खाँसी, जुकाम, टीबी के रोग आदि सब गोमूत्र के सेवन से ठीक हो जाते हैं क्योंकि  यह सल्फर का भंडार है। - टीबी के लिए डोट्स का जो इलाज है, गोमूत्र के साथ उसका...

41 हाइपरथाइराडिज्म, हाइपोथायरायडिज्म

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! हाइपरथाइराडिज्म, हाइपोथायरायडिज्म हाइपरथाइराडिज्म, हाइपोथायरायडिज्म दोनों प्रकार के थाइरोइड का उपचार धनिया से पूरी तरह से इलाज किया जा सकता! थाइरोइड के लिए धनिया चटनी बनाकर दिन में 2 बार इस्तेमाल करें और जिन लोगो का थाइरोइड के कारण वजन या मोटापा बहुत बडा हुआ है उन लोगो को मोटापा भी इसी से कम होगा। थाइरोइड के सभी मरीजो के लिए आयोडीन युक्त नमक जहर के सामान होता है थाइरोइड के सभी मरीजो को सबसे पहले आयोडीन नमक छोडकर उसकी जगह पर सेंधा या काला नमक का ही प्रयोग करना चाहिए क्योकि भारत में आज जितने भी लोगों को है उनका प्रमुख कारण आयोडीन युक्त नमक, भारत में आज आयोडीन की कमी किसी को भी नही है लेकिन सरकार जबरदस्ती ये नमक भारत के सभी लोगों को खिला रही है खाने में हमेशा सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए, ना की आयोडिन युक्त नमक का। चीनी की जगह गुड, शक्कर, देसी खाण्ड या धागे वाली मिस्री का प्रयोग कर सकते है। 42  गोमूत्र-घृत-दुग्ध के गुण    https://nirogi...

40 तपेदिक, क्षयरोग, टीबी (Tubercle Bacillus)

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! तपेदिक, क्षयरोग, टीबी (Tubercle Bacillus) - टीबी के लिए डोट्स का जो इलाज है, गोमूत्र के साथ उसका असर 20-40 गुणा तक बढ जाता है । - आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने टीबी ठीक हो जाता है, लगातार पांच छह महीने पीना पड़ता है । 41  हाइपरथाइराडिज्म, हाइपोथायरायडिज्म    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/41.html

39 गले में कोई भी इन्फेक्शन, टौंसिल

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! गले में कोई भी इन्फेक्शन, टौंसिल गले में कितनी भी खराब से खराब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे  अच्छी दवा है हल्दी । जैसे गले में दर्द है, खरास है, गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टौंसिल हो गया, ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह  खोल कर गले में डाल देना, और फिर थोड़ी देर चुप होकर बैठ जाना तो ये हल्दी गले में नीचे उतर जाएगी लार के साथ, और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । ये छोटे बच्चों को तो जरुर करना य बच्चां के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है ना तो हम अॉपरेशन करवाकर उनको कटवाते है वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है । 40  तपेदिक, क्षयरोग, टीबी (Tubercle Bacillus)   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/40.html

38 दमा, अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! दमा, अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा, टीबी, इनकी सबसे अच्छा दवा है :- - गाय मूत्र :- आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से दमा अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा सब ठीक होता है। और गोमूत्र पीने से टीबी भी ठीक हो जाता है, लगातार पांच छह महीने पीना पड़ता है। ऐसा करने से गौमूत्र 1 में दमा, अस्थमा ठीक है - दमा अस्थमा :- दमा अस्थमा की और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या शहद मिलाकर गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है। ऐसा करने से गौमूत्र 3 में दमा, अस्थमा ठीक है  39  गले में कोई भी इन्फेक्शन, टौंसिल    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/39.html

37 प्रसव में समस्या

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! प्रसव में समस्या प्रसव में देरी होने पर या गर्भ में पल रहे है बच्चे का आडा या उल्टा होने की सबसे अच्छी दवाई है जब डॉक्टर कितना भी चिल्लाये अॉपेशन करवाओ तब आप अपने मरीज को घर ले आओ या ऐसे किसी डॉक्टर के पास मरीज को लेकर ही मत जाइए. गाय के गोबर और गोमूत्र एक ऐसी विशिष्ट दवा हैं जो इस प्रकार के आपात अवस्था मे देने पर फौरन अपना प्रभाव उत्पन्न करती हैं चाहे डॉक्टर कितना ही चिल्लाये आप किसी देशी बछडी का गोमूत्र और गोबर लेकर आपस में मिलाइये और उसका रस निकल कर माँ को चार चार घंटे के अंतर में 3 बार पिला दीजिये पेट के आदत उल्टा बच्चा भी सीधा हो जाता है और बिना किसी दर्द बच्चा बाहर आ जाता है लेकिन ये दवा 9 महीना पूरा होने के बाद होने वाले प्रसव में ही काम आती है उससे पहले ये अगर बच्चा 7-8 महीने में होता है तो ये दवा इतना काम नही आती है ये रुकी हुई प्रसव पीडा को पुन: प्रारंभ करती हैं, शिशु जन्म को सरल बनती हैं तथा गर्भ में   शिशु   की स्थिति को ...

36 बच्चे का पेट में उल्टा होना

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! बच्चे का पेट में उल्टा होना यह एक बहुत ही गंभीर स्थिती है जिससे अधिकांश महिलाएं प्रसव के दौरान गुजरती हैं. अपने विकास काल के दौरान कभी-कभी शिशु गर्भाशय में आडा या उल्टा हो जाता है. यह स्थिति माता और शिशु दोनां के ही जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। होम्योपैथी मैं दवा हैं जो इस प्रकार के आपात अवस्था में देने पर फौरन गर्भ में शिशु की स्थिति को भी पुन: सही कर देती हैं जिसका नाम है Pulsatila 200 37  प्रसव में समस्या   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/37.html

35 गर्भावस्था

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! गर्भावस्था जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चुना रोज खाना चाहिए क्योकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा काल्सियम की जरुरत होती है और चुना कैल्सियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चुना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चुना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाकर रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फाईदे होंगे - पहला फाईदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नोर्मल डेलीभरी होगा, दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हस्त-पुष्ट और तंदरुस्त होगा, तीसरा फायदा वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चुना खाया, और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होसियार होता है बहुत Intelligent और ठतपससपंदज होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है । 36  बच्चे का पेट में उल्टा होना    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/36.html

34 स्त्री रोग(ल्यूकोरिया, रक्त प्रदूर, मासिक धर्म की अधिकता, अनियमितता)

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! स्त्री रोग(ल्यूकोरिया, रक्त प्रदूर, मासिक धर्म की अधिकता, अनियमितता) अशोक 4-5 पतें लीजिये, उसे सुबह उसको आंच पर बर्तन में तब तक उबालें जब तक कि वो आधा ना बचे और फिर ठंडा करके पी लीजिये और पतों को चबाकर खा लीजिये (इसे छन्ना नही है) ऐसा लगातार एक महीने तक करना है अगर एक महीने में पूरा ठीक ना या लाभ कम हो तो फिर से एक महीने और दवा लेना पडेगा मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव, अनियमित मासिक धर्म, ल्यूकोरिया, बदबूदार मासिक धर्म, बवासीर, रजोनिवृति के समय में ये काढा पी सकते हो, शरीर में कहीं दर्द हो तो, मासिक धर्म के दौरान होने वाली किसी भी समस्या के लिए ये राम बाण और अचूक औषधि है मासिक स्राव में किसी भी अगर बहुत तकलीफ हो रही हो तो(ये कमर दर्द, स्तनों में दर्द, पेट दर्द और चक्कर आना (जो की मासिक धर्म के समय पर होती है) होने वाली किसी भी समस्या के लिए ये राम बाण और अचूक औषधि है) 250 ग्राम गर्म पानी में (घी पिघला होतो 3 चम्मच जमा हुआ हो तो 1 चम्मच) डालकर पीने ...

33 कैंसर

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! कैंसर कैंसर बहुत तेजी से बड़ रहा है इस देश में। हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे हैं और हर साल नए केस आ रहे हैं और सभी डॉक्टर हाथ-पैर डाल चुके हैं। राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना कि..........’कैंसर के मरीज को कैंसर से मृत्यु नहीं होती है बल्कि जो ईलाज कैंसर के लिए दिया जाता है उससे मृत्यु होती है।’’ मतलब कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का ईलाज है। ईलाज कैसा है आप सभी जानते हैं.............. कै​िम्योथैरेपी दे दिया, रेडियोथैरेपी दे दिया, कोबाल्ट-थैरेपी दे दिया। इसमें क्या होता है कि शरीर की जो प्रतिरक्षक शक्ति है वो बिल्कुल खत्म हो जाती है। जब कै​िम्योथैरेपी दी जाती है ये बोल कर कि हम कैंसर के सेल को मारना चाहते हैं तो अच्छे सेल  भी उसी के साथ मर जाते हैं। राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो कै​िम्योथैरेपी लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए। लेकिन इसका उल्टा भी रिकार्ड है......राजीव भाई के पास बिना कै​िम्योथैरेपी लिए हुए कोई भी रोगी आया दूसरी या त...

32 न्युमोनिया

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! न्युमोनिया जब फेफड़ों में लगातार दर्द रहने लगे तो न्युमोनिया कहलाता है। यह मुख्य: रूप से ठंड लग  जाने  के  कारण  तथा  फेफड़ों  में  सूजन  आ  जाने  से  हो  जाता  है।  सर्दी,  गर्मी  में परिवर्तन एकाएक पसीना आना, जीवाणुओं द्वारा संक्रमण आदि के कारण हो जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों में कफ बढ़ जाता है। छाती में तेज दर्द रहता है। रोगी को बेहोशी आने लगती है। श्वास लेने में कष्ट होता है और खॉसी की भी शिकायत रहती है। न्युमोनिया में होम्योपैथिक दवा ACONITE -200 की 2 बूंद कप पानी में डालकर एक चम्मच में दिन तीन बार पिलाना है। केवल 1 ही दिन देना है 33  कैंसर    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/33.html

31 मिरगी

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! मिरगी मिर्गी होने का सबसे प्रमुख कारण बुखार होने के समय दी जाने वाली दवाइयाँ के साइडइफेक्ट के कारण आदमी को इस प्रकार की बिमारियों में होती है अत्यधिक शराब पीना, अधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से भी यह बीमारी हो सकती है। इस रोग में अचानक से दौरा पडता है और रोगी गिर पडता है। हाथ और गर्दन अकड जाती है, पलकें एक जगह रूक जाती हैं, रोगी हाथ पैर पटकता है, जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती, मुह से पीला झाग निकलता है। दात किटकिटाना और शरीर में कपंकपी होना सामान्य रूप से देखा जाता है। चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं। इस तरह के दौरे 10-15 मिनट से लेकर 1-2 घण्टे तक के भी हो सकते हैं। पुन: रोगी को जब होश आता है तब थका हुआ होता हैै और सो जाता है। इसके घरेलू उपचार निम्न लिखित हैं। - एक दवा का नाम है Rhustox - 30 इस Rhustox - 30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है Causticum - 1M  जिस दिन Rh...

30 गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छुने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छुने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न नसों में जकड़न और पक्षाघात     या Paralysis में एक दवा का नाम है Rhustox - 30 जिस दिन पक्षाघात आता है रोगी को 15-15 मिनट पर तीन बार दो-दो बूंद मुंह में दे और इसी Rhustox - 30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है Causticum - 1M जिस दिन Rhustox - 30 दिया दसरे दिन Causticum - 1M की दो-दो बूंद  तीन बार दें और Causticum - 1M को Rhustox - 30 के आधे घंटे बाद देना है। ये Rhustox- 30 रोज की दवाई है। पर Causticum - 1M हफ्ते में एक दिन दो-दो बूंद तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) देनी चाहिए।       ऐसे करके पक्षाघात के रोगी को दवा देंगे तो कोई एक महीने में  ठीक हो जायेगा कोई 15-20 दिन में ठीक हो जायेगा किसी को 45 दिन लगेगें और ज्यादातर दो महीने से ज्यादा नहीं लगेंगे ठीक होने में। अगर किसी को Paralysi...

29 बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर - एक केले को बीच से चीरा लगाकर चुना बराबर कपर बीच में रख दें फिर इसे खाए इससे बवासीर एकदम ठीक हो जाती है साथ में देशी गाय का मूत्र भी पीयें। - अगर रोग बढ गया है तो आपको साथ में ये होम्योपैथिक दवा भी खाना होगा -  Nux Vomica 30 - रोज रात को एक बूंद - Sulphar 200 - हफ्ते में एक दिन सुबह-दोपहर-शाम एक-एक बूंद दिन में तीन बार नोट :- अस्थमा के मरीज को कभी भी सल्फर नहीं देना। 30  गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छुने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/30.html

28 पीलिया

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! पीलिया हेपेटाईटस A, B, C, D, E के ईलाज - गेहूँँ के दाने के बराबर चुना गन्ने के रस के साथ पान में लगाकर दिन में एक बार 10 से 12 दिन तक लेना है। - पीलिया होने पर Nux Vomica - 30 2-2 बूंद दिन में तीन बार 10 से 12 दिन तक लेना है। - BERBERIS VULGARIS Mother Tincher की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/4) कप गुणगुने पानी में मिलाकर दिन में चार बार (सुबह, दोपहर, शाम और रात) को लेना है। 29  बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/29.html

27 स्वप्न दोष

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! स्वप्न दोष Nux Vomica 200 रात को सोते समय 2 बूंद हर तीन दिन बाद फिर से ले सकते हैं। रोज  नहीं। 28  पीलिया    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/28.html

26 अपेन्डेक्स (Appendix)

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! अपेन्डेक्स (Appendix) Nux Vomica 200 रात के भोजन के एक घण्टे बाद 2 बूंद फिर तीन दिन बाद 2 बूंदे (दस बार तक ले सकते हैं) OR - Nux Vomica 30 - रोज रात को एक बूंद - Sulphar 200 - हफ्ते में एक दिन सुबह-दोपहर-शाम एक-एक बूंद दिन में तीन बार नोट: - अस्थमा के मरीज को कभी भी सल्फर नहीं देना। 27  स्वप्न दोष   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/27.html

25 घात जाने पर

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! घात जाने पर Nux Vomica 1M सुबह खाली पेट प्रत्येक 1-1 घण्टे में तीन बार देना है। 26  अपेन्डेक्स (Appendix)   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/26.html

24 डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर Nux Vomica 200  2-2 बूंद दिन में तीन बार सुबह, दोपहर व शाम को दो तीन दिन चाल रखना है। हर्निया के लिए Nux Vomica 1M 1-1 बूंद दिन में तीन बार प्रत्येक एक-एक घण्टे से फिर वापिस 15 दिन या फिर 15 दिन बाद तीन महीने तक। 25  घात जाने पर    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/25.html

23 शरीर पर किसी भी तरह का घाव

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! शरीर पर किसी भी तरह का घाव शरीर पर किसी भी तरह का घाव होने पर या चोट लग जाने पर पहले गोमूत्र या गर्म पानी से धोना है। उसके गेंदे के फूल की पंखुड़ियां, हल्दी और गोमूत्र की चटनी बनाकर लगानी है बाद CALENDULA OFFICINALIS (MOTHER TINCHER) लगा कर गेंदे के फूल (पंखुड़ियां) चटनी करके लगाना है।   24  डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/24.html

22 हार्ट अटेक

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! हार्ट अटेक हार्ट अटेक जैसी गंभीर इमर्जंसी में होम्योपैथिक दवा ACONITE -200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में   तीन बार देना है। अगर आपने इतना भी कर दिया तो रोगी की जान बच जायेगी आगे रोगी को कही भी हॉस्पिटल में ले जाने की कोई जरुरत नही पडेगी । कभी कभी तो   ऐसी भी हालत होती है कि रोगी हॉस्पिटल पहुँचने से पहले रास्ते में ही दम तोड देता है क्योंकि हार्ट अटेक के रोगी को फौरन देखभाल तथा उपचार की जरूरत होती है । ये दवा केवल आदमी की जान बचाने के लिये काम आती है अगर आपको आगे हार्ट के ब्लॉकेज को दूर करना है तो आगे आप हदय ब्लॉकेज आर्टिकल पर जाकर पूरा इलाज को पढ सकते है ये दवाई केवल जान बचाने के लिए है क्योंकि इमरजेन्सी मं हदय ब्लॉकेज जब तक दूर होगा जब तक अगर बीच में कभी हदय अटैक आता है तो जान बचाने के लिये काम आती है। गारंटी से ठीक हो जायेगा ये दवा ACONITE -200 खरीद कर अपने घर में रख ले ! 23  शरीर पर किसी भी तरह का घाव    https://nirog...

21 टिटनेस

    भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! टिटनेस लोहे की जंग लगी वस्तु से चोट लगाने पर या वाहन से दुर्घटना होने पर टिटनेस का खतरा पैदा हो जाता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है. होम्योपैथी मैं टिटनेस के लिए दोनां विकल्प मौजूद हैं - 1) चोट लगने पर फौरन ली जाने वाली दवाई ताकि भविष्य मं टिटनेस की सम्भावना न रहे 2) टिटनेस हो जाने पर उसे आगे बढ़ने से रोकने तथा उसके उपचार हेतु ली जाने वाली दवाई जैसे - Hypericum शरीर पर चोट लगने से खून बहने पर होम्योपैथी की दवा हाईपेरिकम200  2-2 बूंद हर आधे       घण्टे से तीन बार, अगर चोट ज्यादा है और खून बह रहा है तो हाईपेरिकम   1M 1-1 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार देना है। अगर सिर पर बहुत चोट हो और सिर से बहुत खून बह रहा हो तो हाईपेरिकम  10M,  50M, 1CM ताकत की दवाई देना होगा। शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे कोई डाईबेटिक  पेशेंट है चोट लग...

19 चोट लगने लेकिन खून ना बहने पर

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! चोट लगने लेकिन खून ना बहने पर शरीर के किसी भी भाग में बिना रक्त निकले चोट लगने या मुड़ जाने पर या मार लगने, गिरने पर अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है। अगर सूजन है या मार ज्यादा लगी है और अगर बेहोशी है तो अर्निका 1M एक बूंद हर एक घण्टे के अंतर में तीन बार देना है। उससे भी ज्यादा गंभीर स्थिति होने पर अर्निका 10M एक बूंद एक ही बार देनी है। हड्डी टूटने पर होम्योपथी दवा अर्निका 1M देना है, जो दर्द को दूर करता हैं। अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है। हड्डी टूटने पर उसे पुन: जोड़ने के लिए अगले दिन से एक दाना गेहूँँ के बराबर चुना दहीं में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है। नोट: - पथरी के मरीज को चुना नहीं लेना है।  20  चोट लगने और खून बहने पर इसकी चिकित्सा    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/20.html

18 पागल कुत्ता काटने

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! पागल कुत्ता काटने अगर घरेलु कुत्ता काटे तो कोई दिक्कत नही है पर पागल कुत्ता कटे तो समस्या है। सड़क वाला कुत्ता काटले तो आप जानते है नही उसको इंजेक्शन दिए हुए है या नही, उसने काट लिया तो आप डाक्टर के पास जायेंगे फिर वो 14 इंजेक्शन लगाएगा वो भी पेट में लगाता है, उससे बहुत दर्द होता है और खर्च भी हो जाता है कम से कम 50000 तक कई बार, गरीब आदमी के पास वो भी नही है। कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंता मत करिए बिलकुल ठीक होगा वो आदमी बस उसको एक दवा दे दीजिये। दवा का नाम है Hydrophobinum 200 और इसको 10-10 मिनट पर जीभ में तीन ड्रोप डालना है। कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दवा दे दीजिये और भूल जाइये के कोई इंजेक्शन देना है। इस दवा को सूरज की धुप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। रेबिस सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटने से रेबिस नही होता। आवारा कुत्तों अगर काट दिया है तो राजीव भाई के अनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने...

17 बिच्छू, मधुमक्खी के काटने पर, सुई या काटा लगने की चिकित्सा

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! बिच्छू, मधुमक्खी के काटने पर, सुई या काटा लगने की चिकित्सा बिच्छू के काटने पर बहुत दर्द होता है जिसको बिच्छू काटता है उसके सिवा और कोई जान नहीं सकता कितना भयंकर कष्ट होता है। तो बिच्छू काटने पर एक दवा है और उसका नाम है Silicea 200 इसका लिक्विड 5 मि.ली. घर में रखें। बिच्छू काटने पर इस दवा को जीभ पर एक बूंद 10-10 मिनट के अंतर पर तीन बार देना है। बिच्छू जब काटता है तो उसका जो डंक है उसको अन्दर छोड़ देता है वो ही दर्द करता है। इस डंक को बाहर निकालना आसान काम नहीं है। डाक्टर के पास जायेंगे वो काट कर चीरा लगायेगा फिर खींच के निकालेगा। खून भी बहेगा और तकलीफ भी होगी। ये दवाई इतनी बेहतरीन है कि आप इसके तीन डोज देंगे 10-10 मिनट पर एक-एक बूंद और आप देखेंगे कि वो डंक अपने आप निकल कर बाहर आ जायेगा। सिर्फ तीन डोज में आधे घण्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते हैं। बहुत जबरदस्त दवाई है ये Silicea 200 यह दवाई और भी बहुत काम आती है। अगर आप सिलाई मशीन में काम करती हैं तो कभी-कभ...

16 सांप के काटने पर चिकित्सा

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! सांप के काटने पर चिकित्सा सांप काटने पर नाजा-30 हर दस मिनट में 2-2 बूंद तीन बार देना है। अगर ठीक हो रहा है, तो इसी को चाल रखना है। अगर समय ज्यादा हो गया या फर्क नहीं है तो नाजा-200 2-2 बूंद हर दस मिनट में तीन बार देना है। ठीक होने पर कोई भी दवा नहीं देना है। अगर नाजा-200 से भी ठीक नहीं है तो नाजा 1M की 2 को बूंद आधा कप पानी में डालकर एक चम्मच हर आधे घण्टे में तीन बार पिलाना है। अगर इससे भी ठीक ना हो तो नाजा 10M की आधा कप पानी मं एक बूंद डाल कर एक चम्मच एक ही बार पिलाना है। जब कन्ट्रोल में आए तो गर्म पानी या मंगदाल का उबाला हुआ पानी देना है। खाना अगर देना है तो थोड़ी मूंगदाल की खिचड़ी दे सकते हैं।   17  बिच्छू, मधुमक्खी के काटने पर, सुई या काटा लगने की चिकित्सा   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/17.html

15 सामान्य चोट

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! सामान्य चोट बच्चो को  खेलते वक्त चोट लगना, और काम करते समय मामूली चोट या कट लगना अथवा वाहन से मामूली दुर्घटना होना । ये सभी सामान्य चोट के अर्न्तगत आते है ऐसे समय में   कुछ उपयोगी होम्योपैथिक दवाए न केवल कटे हुए घाव भरने, रक्तस्त्राव रोकने में उपयोगी है बल्कि ये दर्द को भी कम कर देती है शरीर के किसी भी भाग में बिना रक्त निकले चोट लगने या मुड़ जाने पर या मार लगने, गिरने पर अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है। शरीर पर चोट लगने से खून बहने पर होम्योपैथी की दवा हाईपेरिकम 200 2-2 बूंद हर आधे घण्टे से तीन बार, अगर चोट ज्यादा है और खून बह रहा है तो हाईपेरिकम 1M 1-1 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार देना है।   16  सांप के काटने पर चिकित्सा    https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/16.html

14 मोच

   भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित   निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! मोच सामान्य कार्य के दौरान,भारी वजन उठाने से, गलत तरीके से कसरत करने से आदि अनेक कारन हैं जो मोच के लिए उत्तरदयी हो सकते हैं.प्राय: मोच शरीर के लचीले भागों जैसे कलाई, कमर, पैर, आदि को प्रभावित करती है। मोच के लिए होम्योपैथिक दवा हैं जो ना केवल मोच के दर्द को दूर कर देती हैं बल्कि सुजन को भी दूर करती हैं। हड्डी टूटने पर उसे पुन: जोड़ने के लिए अगले दिन से एक दाना गेहूँ के बराबर चुना दहीं में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है। शरीर के किसी भी भाग में बिना रक्त निकले चोट लगने या मुड़ जाने पर या मार लगने, गिरने पर अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।  15  सामान्य चोट   https://nirogi-niyam.blogspot.com/2025/05/15.html