भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित निरोगी रहने के नियम और गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा ! ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया, डेंगू, स्वाइन फ्ल, इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य के बुखार मित्रो बहुत सारे बुखार तेजी से भारत देश में फैल रहे है ।। करोडो की संख्या में लोग इससे प्रभावित हो रहे है। और लाखों लोग मर रहे है। हमेशा की तरह सरकार के हाथपर हाथ रखे तमशा देख रही है। श्री राजीव दीक्षित जी ने गाँव-गाँव घम-घम कर आयुर्वेदिक दवा से लाखो लोगो को बचाया है।। और ये दवा बनानी कितनी आसान है। 20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई का सत् 5gm, सोंठ (सुखी अदूरक) 10gm, 10 छोटी पीपर के टुकडे, सब आपके घर में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। सब एक जगह पर कटने के बाद एक गिलास पानी में उबालकर काढा बनाना है ठन्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और श्याम तीन बार पीना चाहिए। नीम गिलोई - इसका जस डंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाये, प्लेट-लेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में बहुत ज्यादा काम आता है। एक और अच्छी दवा है, एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हारसिंगार कहते है, संस्कृत में पर पारि...
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